गीत, कविता, प्रार्थना

प्रेरक गीत
  1. अनुकूल हवा में जग चलता, प्रतिकूल चलो तो हम जानें।
  2. अपने अंदर है दुश्मनों का डेरा।
  3. अप्रमाद, गंतव्य दूर तेरा…
  4. आज कल के चक्कर में ही, मानव जाता व्यर्थ छला.......
  5. आत्मश्रद्धा से भर जाऊँ, प्रभुवर ऐसी भक्ति दो।
  6. इष्ट वियोग अनिष्ट योग में, सहनशीलता दिखलाएँ...
  7. चीर कर कठिनाईयों को, दीप बन हम जगमगाएं.....
  8. दुर्गम पथ पर तुम न चलोगे कौन चलेगा?
  9. पर साथी इन बाधाओ को तुम न दलोगे कौन दलेगा?
  10. बुढापा, कोई लेवे तो थने बेच दूं॥
  11. यदि……कर न सको तो…
  12. सोते सोते ही निकल गई सारी जिन्दगी
कविता
  1. अपने अंदर है दुश्मनों का डेरा।
  2. क्रूरता आकर करूणा के, पाठ पढा रही है
  3. छलती है मैत्री
  4. जब वक्त ही न रहा पास तो फिर क्या होगा?
  5. नर-वीर
  6. पश्चाताप
  7. बस लूट हुई स्वाधीन
  8. ब्लॉग मैं लिखता हूँ बस सुमार्ग के लिए
  9. ब्लॉग मैं लिखता हूँ अभिव्यक्ति के लिए
  10. ब्लॉग मैं लिखता हूँ इस अभिलाषा के लिए
  11. ब्लॉग मैं लिखता हूँ इस यकीन के लिए
  12. लूंट हुई स्वाधीन
  13. शृंगार करो ना ...
  14. सपेरों का एक ब्लॉग-माध्यम
दोहे
  1. उपकार
  2. भोग-उपभोग
  3. व्यर्थ वाद विवाद, निर्थक तर्क संवाद॥
  4. संतोष
  5. सत्य-क्षमा
  6. सुख-दुःख
प्रार्थना
  1. अप्रमाद, गंतव्य दूर तेरा…
  2. आत्मश्रद्धा से भर जाऊँ, प्रभुवर ऐसी भक्ति दो।
  3. इष्ट वियोग अनिष्ट योग में, सहनशीलता दिखलाएँ...
  4. चीर कर कठिनाईयों को, दीप बन हम जगमगाएं.....
  5. सोते सोते ही निकल गई सारी जिन्दगी
बोध कविता
  1. नर-वीर
  2. पुरूषार्थ
  3. संगत की रंगत
  4. सन्देश !!

1 टिप्पणी:

  1. सुन्दर कविता जिसके अर्थ काफी गहरे हैं........

    मैंने .. हर रोज .. जमाने को .. रंग बदलते देखा है ....
    उम्र के साथ .. जिंदगी को .. ढंग बदलते देखा है .. !!

    वो .. जो चलते थे .. तो शेर के चलने का .. होता था गुमान..
    उनको भी .. पाँव उठाने के लिए .. सहारे को तरसते देखा है !!

    जिनकी .. नजरों की .. चमक देख .. सहम जाते थे लोग ..
    उन्ही .. नजरों को .. बरसात .. की तरह ~~ रोते देखा है .. !!

    जिनके .. हाथों के .. जरा से .. इशारे से .. टूट जाते थे ..पत्थर ..
    उन्ही .. हाथों को .. पत्तों की तरह .. थर थर काँपते देखा है .. !!

    जिनकी आवाज़ से कभी .. बिजली के कड़कने का .. होता था भरम ..
    उनके .. होठों पर भी .. जबरन .. चुप्पी का ताला .. लगा देखा है .. !!

    ये जवानी .. ये ताकत .. ये दौलत ~~ सब कुदरत की .. इनायत है ..
    इनके .. रहते हुए भी .. इंसान को ~~ बेजान हुआ देखा है ... !!

    अपने .. आज पर .. इतना ना .. इतराना ~~ मेरे .. यारों ..
    वक्त की धारा में .. अच्छे अच्छों को ~~ मजबूर हुआ देखा है .. !!!

    कर सको......तो किसी को खुश करो......दुःख देते ........तो हजारों को देखा है..

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