10 दिसंबर 2010

ब्लॉग मैं लिखता हूँ इस अभिलाषा के लिए

आभिव्यक्ति का अक्षत अनुशासन है हिन्दी।
सहज सरल बोध सा संभाषण है हिन्दी।
समभाषायी छत्र में सबको एक करती है।
कई लोगों का भारती अब भी पेट भरती है।
प्रलोभन में हिन्दी का कहीं हास  हो न जाए। 
मेरी मातृ वाणी का उपहास  हो न जाय।
इसलिए मैं लिखता मेरी भाषा के लिए।
ब्लॉग मैं लिखता हूँ इस अभिलाषा के लिए॥
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20 टिप्‍पणियां:

  1. waah sugyji!
    apni hindi to apni hi hai ...
    'isliye......................
    ..................abhilasha ke liye.
    isi samarpan ki jaroorat hai aaj...
    bahut uchch vichar...
    sunder bhav...

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  2. बहुत सुन्दर भावना हैं ... भाषा के प्रति आपका लगाव सराहनीय है ...

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  3. प्रलोभन में हिन्दी का कहीं हास ना हो जाए।
    और मेरी मातृ वाणी का उपहास ना हो जाय।
    इसलिए मैं लिखता मेरी भाषा के लिए।
    ब्लॉग मैं लिखता हूँ इस अभिलाषा के लिए॥
    सार्थक सोच से लिखी सुन्दर भावपूर्ण रचना

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  4. बहुत अच्छी भावना है। इसी तरह की भावना से इस भाषा का विकास संभव है। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
    विचार-मानवाधिकार, मस्तिष्क और शांति पुरस्कार

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  5. बहुत बेहतरीन अभिलाषा है... हिंदी हमारी भाषा ही नहीं हमारा गर्व है...

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  6. अच्छी बात कही |हिंदी हमको भी प्यारी है |

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  7. सुरेन्द्र सिंह जी,
    महेन्द्र मिश्र जी,
    कविता रावत जी,
    मनोज कुमार जी,
    शाहनवाज़ साहब,
    और अंशुमाला जी,

    हमारी भाषा के प्रति मेरे भाव की सराहना के लिये आभार।

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  8. और मेरी मातृ वाणी का उपहास ना हो जाय।
    इसलिए मैं लिखता मेरी भाषा के लिए।
    बहत खूब कहा है .

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  9. मैं सावधान की मुद्रा में खड़ा हूँ और नमन करता हूँ हमारी मातृभाषा को और आपके जज़्बे को!!

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  10. सुन्दर रचना के साथ साथ नेक भावना, ...आपका साधुवाद.

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  11. बहुत सुंदर विचार जी, धनयवाद

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  12. चोर चोर मोसेरे भाई
    देश में सबसे बढ़ा संचार घोटाला हुआ इस पर भाजपा का संसद में शोर शराबा हुआ और जे पी सी की मांग को कोंग्रेस लगातार तानाशाहों की तरह ठुकराती रही ऐसे घोटाले पहले भी हुए हें कोंग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री सुखराम के खिलाफ तो इस घोटाले में पकड़े जाने के बाद मुकदमा चला और सजा हुई , भाजपा शासन में ऐसे ही घोटालों में पूर्व मंत्री स्वर्गीय प्रमोद महाजन पर अरबों रूपये के आरोप लगे और फिर उनसे इस्तीफा लिया गया , भाजपा के ही अरुण शोरी को आरोपों के बाद पद से हटाया गया अब ऐ राजा इस भ्रस्ताचार की गिरफ्त में हे लेकिन देश के बढ़े उद्योगपति जो इस घोटाले में शामिल हें उन रतन जी टाटा ने सुप्रीम कोर्ट की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा हे के संचार घोटाले मामले की जाँच वर्ष २००१ से होना चहिये रतन टाटा ने ऐसा क्यूँ बयान दिया हे वेसे तो सब जानते हें लेकिन जब रतन टाटा ने गेर जरूरी तोर पर इस मामले में प्रधानमन्त्री मनमोहन सिघ की वकालत की तो बात साफ़ हो गयी और सब जान गये के रतन टाटा ने यह बयान दिया नहीं बलके उनसे यह बयान किसी दबाव में दिलवाया गया हे ताकि भाजपा जे पी सी की मांग से बेकफुट पर आजाये और कोंग्रेस भाजपा चोर चोर मोसेरे भाई की तरह तू मेरी मत कह में तेरी नहीं कहूँ की तर्ज़ पर खामोश हो जाए । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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  13. ये तो नयी जानकारी दी है आपने और ये बहुत सुन्दर बात है , आपका का ब्लॉग ब्लॉगजगत के उन प्रमुख में से है जिनका में ह्रदय से सम्मान करता हूँ

    राज की बात :
    मेरी हिंदी कोई ख़ास अच्छी नहीं है

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  14. हिंदी के प्रति आपकी भावना वन्दनीय है . सुन्दर अभिव्यक्ति है.

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  15. बहुत ही सुंदर.... सुन्दर अभिव्यक्ति........

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  16. सुग्य जी ,
    `इसलिए मैं लिखता मेरी भाषा के लिए।
    ब्लॉग मैं लिखता हूँ इस अभिलाषा के लिए॥`

    आपकी सुन्दर अभिलाषा के लिए मेरी शुभकामनाएं !
    राष्ट्र भाषा हिंदी के लिए आपके समर्पण को मैं नमन करता हूँ !

    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  17. बहुत खूब भाई जी , आपकी भाषा को हार्दिक शुभकामनायें !

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