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25 दिसंबर 2010

ब्लॉगजगत, संतब्लॉगर और आशिर्वाद


ब्लॉगजगत में एक संत ब्लॉगर, ब्लॉग दर ब्लॉग घूम रहे थे। साथ एक शिष्यब्लॉगर भी था। संतब्लॉगर छांट-छांट कर ब्लॉग्स पर आशिर्वाद - टिप्पणियाँ कर रहे थे। अच्छे विचारों वाले ब्लॉग्स पर आशिर्वाद देते “आपका ब्लॉग न जमें”  और दुर्विचारों वाले ब्लॉग्स पर आशिर्वाद देते “आपका ब्लॉग, पोस्ट-दर-पोस्ट से हरा भरा रहे”

शिष्यब्लॉगर को बडा आश्चर्य हो रहा था, उसने पूछा महात्मन् यह क्या? आप बुरे विचार फ़ैलाने वालों को तो पोस्टों से भरने-फूलने का आशिर्वाद दे रहे है, और अच्छे ब्लॉग्स को उजडने का?

संतब्लॉगर ने शिष्य को समझाते हुए कहा- अच्छे विचारवान ब्लॉगर कहीं भी जाय, हमेशा अच्छे विचारों का प्रसार ही करेंगे, जब उनके ब्लॉग नहीं जमेंगे तो वे निश्चित ही दूसरे ब्लॉग पर अच्छे विचारों की टिप्पणियाँ करेंगे, जिससे अच्छे विचारों का प्रसार होगा।

शिष्यब्लॉगर- तो फ़िर दुर्विचारों वाले ब्लॉग्स को अधिक पोस्ट का आशिर्वाद क्यों?

संतब्लॉगर- वे दुर्विचार वाले ब्लॉगर, मात्र अपने ब्लॉग पर लिखने में ही व्यस्त रहेंगे। इसतरह उन्हें दूसरे ब्लॉग्स पर कुविचार टिप्पणियाँ करने का समय ही नहीं मिलेगा। जिससे दुर्विचार का फैलाव न होगा, और दुर्विचार उनके अपने ब्लॉग तक सीमित हो जाएँगे। जिन पाठको का सद्विचार से दूर दूर तक कोई नाता न होगा, वे पाठक ही उन ब्लॉग्स पर जाएगें। और इस तरह दुर्विचारों का प्रसार व प्रचार न हो पाएगा।

शिष्यब्लॉगर, संतब्लॉगगुरू  की औजस्वी निर्मलवाणी में छिपी दूरदृष्टि देख नतमस्तक हो गया।
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