19 नवंबर 2010

वाह रे ! इन्सान तेरी इन्सानियत…………


इन्सान, जो भी दुनिया में है सभी को खाना अपना अधिकार मानता है।

इन्सान, पूरी प्रकृति को भोगना अपना अधिकार मानता है।

इन्सान, अपने लिये ही मानवाधिकार आयोग बनाता है।

इन्सान, अपने विचार थोपने के लिये अपने बंधु मानव की हत्या करता है।

इन्सान, स्वयं को शोषित और अपने ही बंधु-मानव को शोषक कहता है।

इन्सान, स्वार्थ में अंधा प्रकृति के अन्य जीवों से बेर रखता है।

इन्सान, कृतघ्न जिसका दूध पीता है उसे ही मार डालता है।

इन्सान, कृतघ्न अपना बोझा ढोने वाले सेवक जीव को ही खा जाता है।


ऐसी हो जब नीयत, क्या इसी को कहते है इन्सान की

इन्सानियत?……………
_______________________________

32 टिप्‍पणियां:

  1. dekh teri is duniya men kitna bdl gya he insaan insan ke bhesh men bs gya he ab shetaan . akhtar khan akela kota rajsthan achchi post ke liyen mubarkbad

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  2. मित्र अच्छा लगा यह पोस्ट पढ़ के. अपनी विचारों को प्रकट करने का सही तरीका. सत्य एक होता है ज्ञानी उसको अलग अलग तरीके से बता ते हैं क्यों की सब का ज्ञान एक सामान नहीं होता.

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  3. अख्तर भाई,
    कोटा में सब कुशल है? सही कहा, इन्सान के भेष में शैतान आ बसे है।

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  4. मासूम साहब,
    आपको अच्छा लगा, समझो पोस्ट सफ़ल!!
    बाकि सत्य तो एक ही होता है, और मार्ग भी एक। ज्ञानी भी उसी एक को ही प्रकशित करते हैं, बस अज्ञानी और जड बुरे कर्मों में फसे रहते है।

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  5. मैं लगभग दस बारह साल की उम्र तक नासमझी में घर के बाकी बच्चों को देख कर मांसाहारी बनी हुई थी लेकिन अपनी समझ आते ही मुझे ये कार्य काफी गलत लगा और मैं शाकाहारी बन गई और आज तक शाकाहारी हुं | इसलिए जब आँख खुले तभी सवेरा समझिये और जिन लोगों को अब अपनी गलती का पता चल रहा है उन्हें आज से ही केवल स्वाद के लिए जीव हत्या करना बंद कर देना चाहिए | सुज्ञ जी इस मुहिम में मैं भी आप के साथ हुं |

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. जमीनी सच्‍चाइयों से गहरा परिचय, आपके रचनाओं की ताकत है ।

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  8. धन्यवाद, अंशुमाला जी, मांसाहार का सवाल तो बादमें आता है, प्रथम है हिंसा से दूरी, और मन की कोमल भावनाओं (वही जो जिक्र आपने किया, और समझ आते ही प्रकट हुई)को बचाना है। क्रूरता भाव कहीं हमारे ह्रदय में प्रवेश न कर ले। बस यही मुहिम है।

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  9. सुज्ञ जी @ मित्र चलिए आज मुझे आप यह बता दें की मैं शाकाहारी हूँ या मांसाहारी? यहाँ भी आप शक कर पाएंगे मित्र लेकिन बता नहीं पाएंगे.
    आप को मालूम है मैं ratol(चूहा मारने की वोह दावा जिसमें चूहा प्यास के कारण दम तोड़ देता है) का इस्तेमाल नहीं करता. क्यों?
    और मैं इस्लाम धर्म के हर कानून (जो कुरान मैं है ) उसको सही मानता हूँ और दूसरे धर्म के लोगों से चाहता हूँ की वोह भी अपने धर्म की बातों के प्रति वफादार रहें. ऐसा करते हुए हर व्यक्ति एक साथ प्रेम भाव से रह सकता है

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  10. मासूम साहब,

    यह कैसे बता पाउंगा? पर अभी शाकाहारी मांसाहारी विषय यह नहिं है।
    हां आपके चूहों के प्रति करूणा भाव को प्रणाम करता हूँ। आपके अपने धर्म पालन का स्वागत और सम्मान करता हूं, मैं भी मेरे धर्म के प्रति वफादार ही हूं पर वह मेरा व्यक्तिगत मामला है। मैं बताता भी नहिं (आपने ध्यान रखा होगा तो आपको ज्ञात ही होगा)

    पर यहां मामला विस्तृत अहिंसा का है जो मात्र मेरे धर्म का नहिं, करूणा ही मुझे प्रिय है। और देखिये यहां सिरे अलग हो जाते है। कैसे मैं वफादार रहूं और कैसे आप वफादार रहें। आप ही सोचिये…

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  11. आप बहुत अच्छा लिखते हैं, लेकिन कुछ लोग सिर्फ विरोध करने के लिये ही होते हैं... एक निरीह जानवर की जगह अपनी गर्दन या अपने बच्चे की गर्दन की कल्पना करें...

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  12. मामला विस्तृत अहिंसा का? अहिंसा इंसानों के प्रति या जानवरों के प्रति? आशा है आप उन सभी पोस्ट पे अपनी आपत्ति जताएंगे जो स्वाद के लिए पशु वध को सही बताते हैं. पानी विचार धारा के प्रति इमानदारी को मैं भी पसंद करता हूँ.

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  13. विस्तृत अहिंसा का तात्पर्य है जानवरों तक।
    कहनें का आशय समझना जरूरी है।

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  14. अरे! आपने विज्ञान नहीं पढा क्या ?
    विज्ञान की अलाणी थ्यौरी,फिलाना सिद्धान्त ये कहता है कि ये कोई पाप नहीं है, बुराई नहीं है...इस बात तो तो विज्ञान भी पूर्व करता है कि यही असली इन्सानियत है.
    आप कुछ नहीं जानते :)

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  15. यह वाला कौन सा विज्ञान है?
    विशेष ज्ञान? या
    विचित्र ज्ञान?, मैं नहिं जानता :))

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  16. प्रिय बंधुवर हंस राज 'सुज्ञ'जी
    राम राम सा !
    राजी-ख़ुशी हो ?
    धंधा-बाड़ी आछा है ?
    सब कुशल-मंगल ही चाहिए ।

    इंसान की नीयत , असलियत और सच्ची इंसानियत पर बहुत सुंदर विचारों की माला पिरोई है आपने …
    आभार !

    सच में आज इंसान इंसानियत खो'कर कुछ और ही बनता जा रहा है ।
    मेरे एक गीत की कुछ पंक्तियां आपको सादर समर्पित हैं -
    बदल बदल लिबास परेशान हो गया
    चेहरों पॅ चेहरे ओढ़ के हैरान हो गया
    ख़ुद की तलाश में लहूलुहान हो गया
    इंसान खो गया

    धर्मांध उग्रवादी मुज़ाहिद - ओ ज़िहादी
    चरमपंथी सुन्नी - शिया और तिलकधारी
    दहशतपसंद जंगजू तालिबान हो गया
    इंसान खो गया

    रगों में है लहू न जाने कितने रंग का
    क्या ख़ूब अलग ही नमूना अपने ढंग का
    शैतान का लिखा हुआ दीवान हो गया
    इंसान खो गया


    फिर भी कहूंगा -
    इंसान का इंसान से हो भाईचारा …

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  17. आज का इंसान क्या इंसान रह गया है .... ऊपर वाले की बनाई इस काया के नाम पर दाग बन कर रह गया है इंसान .....

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  18. इंसानियत के नाते ही मैंने आजसे 20 साल पहले मांस खाना छोड़ दिया था। इस लिहाज से मैं अभी तक तो स्‍वयं को शाकाहारी मानता रहा था, पर इस लेख को पढ़कर मेरी चूलें हिल गयी हैं।

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  19. जाक़िर भाई जिसकी जितनी क्षमता अहिंसा को इतनी ही गहराई तक ले जा सकता है। यही बहुत कुछ है आपने इंसानियत के नाते मांस खाना छोड़ दिया। और वह भावना प्रशंसा काबिल है। लेकिन उक्त लेख की शुद्ध शाकाहारिता भी सम्भव है। पर अधिक गहराई देख पलायन भी न हो, यह भी सच्चाई है कि इन्सान जितना उसके लिये सम्भव हो अपनाये। या कहें कि त्याग करे।

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  20. मनोज जी,
    भारतीय नागरिक जी,
    पं.डी.के.शर्मा"वत्स" जी,
    सदा जी,
    राजेन्द्र स्वर्णकार जी,
    एवं जाकिर भाई,

    सार्थक इन्सानियत को समर्थन का अहोभाव से आभार।

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  21. मासूम साहब,

    चलो, निरवध का संदेश और अमन का पैगाम आओ साथ साथ पहुँचाएं

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  22. हमारा देश भारतवर्ष अनेकता में एकता, सर्वधर्म समभाव तथा सांप्रदायिक एकता व सद्भाव के लिए अपनी पहचान रखने वाले दुनिया के कुछ प्रमुख देशों में अपना सर्वोच्च स्थान रखता है, परंतु दुर्भाग्यवश इसी देश में वैमनस्य फैलाने वाली तथा विभाजक प्रवृति की तमाम शक्तियां ऐसी भी सक्रिय हैं जिन्हें हमारे देश का यह धर्मनिरपेक्ष एवं उदारवादी स्वरूप नहीं भाता. .अवश्य पढ़ें धर्म के नाम पे झगडे क्यों हुआ करते हैं ? हिंदी ब्लॉगजगत मैं मेरी पहली ईद ,इंसानियत शहीद समाज को आज़ाद इंसान बनाया करते हैं
    ब्लोगेर की आवाज़ बड़ी दूर तक जाती है, इसका सही इस्तेमाल करें और समाज को कुछ ऐसा दे जाएं, जिस से इंसानियत आप पे गर्व करे.

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  23. .

    इंसानियत का सन्देश देता बेहतरीन लेख !

    .

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  24. Ajj ke Insaan ka badalta swaroop dekh bahut kuch sochne par majboor karta hai.....
    bahut achhi saarthak soch liye prastuti ..

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  25. हंस राज 'सुज्ञ ki Bahut Achha likha hai. Main Aapse sahmat hun. Apki is saarthak prastuti par aapko badhaai deta hun.

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  26. "हंस राज 'सुज्ञ ki" ke sthan par हंस राज 'सुज्ञ Ji" padhaa jaaye. Truti ke liye khed hai.

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  27. यदि आप को "अमन के पैग़ाम" से कोई शिकायत हो तो यहाँ अपनी शिकायत दर्ज करवा दें. इस से हमें अपने इस अमन के पैग़ाम को और प्रभावशाली बनाने मैं सहायता मिलेगी,जिसका फाएदा पूरे समाज को होगा. आप सब का सहयोग ही इस समाज मैं अमन , शांति और धार्मिक सौहाद्र काएम कर सकता है.
    अपने  कीमती मशविरे देने के लिए यहाँ जाएं

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